चमत्कारी पत्थर की कहानियां

 एक गांव में श्याम नाम का मजदूर रहता था। श्याम के पास न ही नौकरी और न ही पक्की मकान केवल रहने के लिए झोपड़ी था । 

श्याम खेतों में मजदूरी करके अपना घर चलाता था।


श्याम खेत में काम कर रहा था तभी बारिश हो गयी और उस बारिश में श्याम पूरी तरह से भीग गया ।


श्याम जब घर लौटा तो श्याम को तेज बुखार हो गया जिससे श्याम दूसरे दिन मजदूरी करने नहीं जा पाया


श्याम उदास होने लगा कि कैसे मैं अपने घर का राशन का खर्च उठा पाऊंगा। श्याम रोने लगा।


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 तभी उसके झोपड़ी से एक पत्थर नीचे गिरा ,वह पत्थर चमक रहा था । 

 श्याम उस चमकते हुए पत्थर को देखकर उसके पास जाता है और उस पत्थर को अपने हाथ में उठा लेता है।


 तभी पत्थर बोलने लगता है पुत्र श्याम तुम्हें क्या चाहिए यह सुनकर श्याम घबराने लगता है।


  पत्थर बोलता है डरो मत श्याम तुम्हें क्या चाहिए 

 श्याम- पर मुझे कुछ नहीं चाहिए, बस मुझे मजदूरी करने के लिए जाना है। 


 लेकिन मुझे तेज बुखार है जिस कारण मजदूरी करने नहीं जा सकता और अपने घर का राशन नहीं जुटा पा रहा हूं। लेकिन थोड़ी देर में ही चमत्कारी पत्थर ने श्याम के दूखो का अंत कर दिया।

 श्याम ठीक हो गया और मजदूरी करने जाने लगा

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