बकरी व उसके बच्चे पंचतंत्र की कहानियां

बकरी व उसके बच्चे पंचतंत्र की कहानियां

 एक गांव के किसान के घर में बकरी और उसके तीन बच्चे थे। बकरी अपने तीनों बच्चों को हरी- हरी घास चराने के लिए जंगल में ले जाती व पेट भर जाने पर बकरी अपने बच्चों को सुरक्षित घर लौटाती। यह रोज का सामान्य था।


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शाम होने का था, जंगल से घर लौटने के लिए मां बकरी अपने बच्चों को बुलाती है। 

तब बकरी का दो ही बच्चा , एक बच्चा नहीं था ।

बकरी बहुत चिंतित होने लगा।


इधर-उधर जंगल में ढुंढने लगा लेकिन बकरी का एक बच्चा का कहीं पता न चला। बकरी अपने घर निराश लौटती हैं और दूसरे दिन बकरी और बच्चे ढुंढने सवेरे निकल जाते हैं।

लेकिन दूसरे दिन भी कुछ पता नही चलता।


बकरी अपने दोनों बच्चों को घास चरने के लिए छोड़ती है, तभी बकरी के दूसरे बच्चे को लकड़बग्घा उठा के ले जाती है।

मां बकरी अपने बच्चा को बचाने के लिए लकड़बग्घा का पीछा करती है, लेकिन लकड़बग्घा चकमा देकर भाग जाता है, पर तीसरे दिन बकरी और उसके बच्चे योजना बनाकर आते हैं और अपने बच्चे को कुएं के पास रखता है और मां बकरी कुएं के पास छिप जाती है तभी लकड़बग्घा देखकर बकरी के बच्चे पर झपट्टा मारने के लिए दोड़ती है तब कुएं के पास छिपी मां बकरी अपने सिंग से कुएं में फेंक देती हैं। जिससे कुएं में डूबकर लकड़बग्घा की मृत्यु हो जाती है और बकरी व बच्चा घर खुशी - खुशी वापस लौट जाती हैं

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