खरगोश और गिलहरी की मित्रता पंचतंत्र की कहानियां

 

खरगोश और गिलहरी की मित्रता पंचतंत्र की कहानियां

एक सुंदर जंगल में बहुत सारे छोटे-बड़े जीव रहते हैं जिनमें खरगोश और गिलहरी की मित्रता पर सभी जीव प्रसंशा करते , उस जंगल का राजा शेर भी खरगोश और गिलहरी की मित्रता व बुद्धिमता पर बहुत खुश रहते थे। राजा 

शेर को किसी भी समस्या आ जाने पर समस्या का हल खरगोश और गिलहरी से निकलवाते।


दोनों मित्र एक दूसरे के बगैर नहीं रहते थे।


खरगोश ने कहा - चलो मित्र टहलने चलते हैं।

गिलहरी- हां मित्र चलों।


"खरगोश व गिलहरी टहलने निकल गये"


खरगोश- मित्र मुझे बहुत भूख लगा है 

गिलहरी- हां मित्र चलते-चलते बहुत भूख लग गया है चलों आम खाते हैं 


खरगोश- हां मित्र चलों आम खाते हैं

गिलहरी- मित्र मैं आम के पेड़ से आम तोड़ता हूं


दोनों मित्र ने आम भरपेट खाये और आगे बढ़ने लगे तभी उन दोनों मित्र को आवाज सुनाई दिया ऐसा लगा कोई मदद मांग रहा है। खरगोश व गिलहरी उस आवाज के तरफ चलते गये । दोनों मित्र को एक मोर दिखाई दिया जो शिकारी के जाल में फंस चुका था ।


मोर ने कहा भैया मुझे कृपया इस जाल से निकालो मुझे शिकारी से बचालो।

खरगोश और गिलहरी झटपट उस जाल को कुतरने लगा एवं मोर को जाल से मुक्त कर दिया।


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खरगोश- मित्रों यहां से शीघ्र ही निकलो कहीं शिकारी आ न जाए खरगोश गिलहरी और मोर सुरक्षित स्थान पर चले गए।


खरगोश व गिलहरी ने पूछा- मित्र मोर आप शिकारी के जाल में कैसे फंस गए ।


मोर- क्या बताऊं भैया भोजन की तलाश में घूम रहा था तभी मुझे कुछ दाने बिखरे हुए दिखाई दिये और उसे देखकर खाने गया तो शिकारी के जाल में फंस गया।

यह कहकर मोर धन्यवाद बोलने लगा


तीनों बातें करते - करते अपने घर आ गए और दूसरे दिन खरगोश और गिलहरी ने राजा शेर को पूरी घटना बताई।


तथा जंगल के सभी जीव व राजा शेर ने खरगोश और गिलहरी की मित्रता पर सम्मानित किए 


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